Skip to main content

Posts

Yoga गाइड

  योग गाइड : मुझे योग का फायदा क्यों नहीं हो  अक्सर लोगों का यह कहते हुए सुना जाता है कि मैं रोजाना योग कर रहा हूं लेकिन इसका फायदा नहीं मिल रहा है। एक्स्पर्ट के मुताबिक जितना योग करना जरूरी है उतना ही अहम है कि इसे कैसे और कब कर    7 प्वाइंट्स : योग गाइड 1. कब करें योग करने का सबसे अच्छा समय सुबह 4 से 7 बजे का होता है। ऐसा न कर पाने पर सूर्यास्त के बाद भी कर सकते हैं। अगर इसके अलावा कर रहे हैं तो खाना खाने के 4 घंटे बाद ही करें। 2. कैसे कपड़ें पहनें योग करने के लिए हमेशा ऐसे कपड़े पहनें जिसमें आप कंफर्टेबल हों और थोड़े ढीले होने चाहिए। खास बात है कि कपड़े सूती हों तो ज्यादा बेहतर है। ऐसा न हो पाने पर ट्रैक सूट भी पहन सकते हैं। 3. कैसे हो खानपान खाने में हल्की चीजें शामिल ​करें। सब्जी, दालें, सलाद और रोजाना कम से कम एक फल जरूर शामिल करें। इससे शरीर को जरूरी विटामिंस और मिनिरल्स भी मिलते हैं और योग का असर जल्द दिखता है। 4. कैसा हो माहौल  योग करने के लिए हमेशा शांत और हरियाली वाला स्थान चुनें क्योंकि ऐसी जगहों पर आॅक्सीजन की मात्रा अधिक होती है। आॅक्सीजन का शरीर म...
Recent posts
  शितली प्राणायाम शीतली प्राणायम चंदभेदी प्राणायाम अन्य प्राणायाम संपादित करें इसके अलावा भी योग में अनेक प्रकार के प्राणायामों का वर्णन मिलता है जैसे- 1. अनुलोम-विलोम प्राणायाम 2. अग्नि प्रदीप्त प्राणायाम 3. अग्नि प्रसारण प्राणायाम 4. एकांड स्तम्भ प्राणायाम 5. सीत्कारी प्राणायाम 6. सर्वद्वारबद्व प्राणायाम 7. सर्वांग स्तम्भ प्राणायाम 8. सम्त व्याहृति प्राणायाम 9. चतुर्मुखी प्राणायाम, 10. प्रच्छर्दन प्राणायाम 11. चन्द्रभेदन प्राणायाम 12. यन्त्रगमन प्राणायाम 13. वामरेचन प्राणायाम 14. दक्षिण रेचन प्राणायाम 15.शक्ति प्रयोग प्राणायाम 16. त्रिबन्धरेचक प्राणायाम 17. कपाल भाति प्राणायाम 18. हृदय स्तम्भ प्राणायाम 19. मध्य रेचन प्राणायाम 20. त्रिबन्ध कुम्भक प्राणायाम 21. ऊर्ध्वमुख भस्त्रिका प्राणायाम 22. मुखपूरक कुम्भक प्राणायाम 23. वायुवीय कुम्भक प्राणायाम 24. वक्षस्थल रेचन प्राणायाम 25. दीर्घ श्वास-प्रश्वास प्राणायाम 26. प्राह्याभ्न्वर कुम्भक प्राणायाम 27. षन्मुखी रेचन प्राणायाम 28. कण्ठ वातउदा पूरक प्राणायाम 29. सुख प्रसारण पूरक कुम्भक प्राणायाम 30. नाड़ी शोधन प्राणायाम व नाड़ी अवरोध प्रा...

Yoga

  योग' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत धातु 'युज' से हुई है, जिसका अर्थ है  'जोड़ना' या 'जोड़ना' या 'एकजुट होना'।  योगिक ग्रंथों के अनुसार योग के अभ्यास से व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक चेतना के साथ मिलन होता है, जो मन और शरीर, मनुष्य और प्रकृति के बीच पूर्ण सामंजस्य का संकेत देता है।

स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री हरिनन्दन प्रसाद सिंह

 Aस्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री हरिनन्दन प्रसाद सिंह        स्वर्गीय श्री हरिनन्दन प्रसाद सिंहजी का जन्म सन 1917 में श्री फिरंगी सिंहजी और श्रीमती लड्डू देवी के घर में खोजागाछी ग्राम में हुआ था!उनके एक बड़े भाई और दो बड़ी बहनें थी! दूध पीते बच्चे थे जब उनकी माँ गुज़र गयीं!दोनों बड़ी बहनों ने उन दोनों भाइयों की परवरिश की! हरिनन्दन बाबू की प्राथमिक शिक्षा गांव में प्राइवेट शिक्षक से पढ़ कर हुई! इंटर की पढ़ाई नालंदा कॉलेज, बिहारशरीफ़ से की!वो रोज़ाना गांव से ही आना -जाना करते थे!उनकी स्नातक की पढ़ाई टी एन बी कॉलेज, भागलपुर से किया!उसी दौरान सेना में भर्ती हुए! कुछ वर्ष कार्यरत रहे,उन्हीं दौरान द्वितीय विश्व युद्ध की घोषणा हुई!सन 1939 में वे 22वर्ष के नौजवान थे!1939 से 1945  दूसरा विश्व युद्ध चला!बड़े भाई के निरंतर दवाब से झुकना पड़ा!वे उनका काफ़ी लिहाज करते थे और मोह भी था! हरिनन्दन बाबू सेना की नौकरी से त्यागपत्र देकर वापिस गांव आ गये! विवाह हुआ आशा देवी से ,1942 में एक बेटी उषा @भवानी हुई पर उनका मन नहीं माना!उन्होंने फिर से ऐयरफोर्स में पायलट पद के लिए आवेदन दिया, सा...

Yoga: योग, ध्यान, प्राणायाम, मुद्राएं और हिंदू दर्शन

Yoga योग, ध्यान, प्राणायाम, मुद्राएं और हिंदू दर्शन योग, ध्यान, प्राणायाम, मुद्राएं और हिंदू दर्शन योग का संक्षिप्त इतिहास (History of Yoga) योग का उपदेश सर्वप्रथम ब्रह्मा ने सनकादिकों को, पश्चात विवस्वान (सूर्य) को दिया। बाद में यह दो शाखाओं में विभक्त हो गया। एक ब्रह्मयोग और दूसरा कर्मयोग। ब्रह्मयोग की परम्परा सनक, सनन्दन, सनातन, कपिल, आसुरि, वोढु और पच्चंशिख नारद-शुकादिकों ने शुरू की थी। यह ब्रह्मयोग लोगों के बीच में ज्ञान, अध्यात्म और सांख्य योग नाम से प्रसिद्ध हुआ।दूसरी कर्मयोग की परम्परा विवस्वान की है। विवस्वान ने मनु को, मनु ने इक्ष्वाकु को, इक्ष्वाकु ने राजर्षियों एवं प्रजाओं को योग का उपदेश दिया। उक्त सभी बातों का वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है। वेद को संसार की प्रथम पुस्तक माना जाता है जिसका उत्पत्ति काल लगभग 10,000 वर्ष पूर्व का माना जाता है। पुरातत्ववेत्ताओं अनुसार योग की उत्पत्ति 5000 ई.पू. में हुई। गुरु-शिष्य परम्परा के द्वारा योग का ज्ञान परम्परागत तौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता रहा।भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 व...